• वह रिश्ते जो खड़े होते हैं शक और अविश्वास की बुनियाद पर ढह जाते हैं रेत के घर-घूलों की तरह इन रिश्तों का कोई ...
  • कल मैंने देखा था तुम्हें अपने जन्मदिन के एक समारोह में गरीबों को कंबल,अनाज,फल और रूपये बांटते हुए और आज उस गरीब को तुमने ...
  • तुम पतझड़ में उजड़े हुए बाग की तरफ देखते ही क्यों हो….! खिले हुए चमन को देखो ना तुम ठहरे हुए तालाब के पानी ...
  • अब बदल गया जमाना है यहाँ हर कोई दौलत का दीवाना है इंसा का ईमान है दौलत दौलत ही भगवान है दौलत से आंकी ...
  • हम उन्हें बुराई का बदला अच्छाई से देते रहे उनकी हर नफरत का जबाब प्यार से देते रहे क्योंकि हम जानते हैं कि बुराई ...
  • शक खड़ी कर देता है इंसानों के बीच नफरत की एक दीवार शक बड़ा देता है रिश्तों में दूरियां शक पैदा कर देता है ...
  • जो कुछ तुम्हें मिला है क्यों उससे संतुष्ट नहीं हो तुम…! जो नहीं मिला क्यों उसे पाना चाहते हो…! जो कभी नहीं मिल सकता ...
  • कितने दुखी हो तुम इस जिंदगी से जैसे जिंदगी कोई सजा हो तुम्हारे लिए शायद इसलिए कि तुम्हें सिर्फ सुखों की चाहत है दुखों ...
  • दिल में आस और मन में आत्मविश्वास लिए तुम मंजिल की ओर बढ़े चले जा रहे हो तुम्हारी निगाहें सिर्फ मंजिल की ओर हैं ...
  • एक छोटे से दुख से हार मानकर तुम जिंदगी जीना छोड़ दोगे- – -? थोड़ा सा कुछ खोने पर कितनी शिकायत है तुम्हें जिंदगी ...