• 562
    5

    नहीं चाहिए मुझे वो गुमनाम जिंदगी जिसमें होती है अत्याचारों की गंदगी नहीं चाहिए मुझे वो दौलत के महल जहां घृणा और स्वार्थ पलता हो हरपल ...
  • 488
    2

    अनूठी को आज तक अफसोस है अपने बचपन को बचपन की तरह न जी पाने का!इस दुनियाँ में हर इंसान परिस्थतियों का गुलाम होता है अनूठी ...
  • 696
    8

    तुम्हारा मेरी जिंदगी में आना…. जैसे शांत समुंदर में मौजों का शोर मचाना जैसे कड़कड़ाती ठंड में सुबह की गुनगुनी धूप का निकल आना तुम्हारा मेरी ...
  • 586
    4

    “ए का कर रहा है तू….कहां था इतने दिनों से” खेत में हल जोत रहे हरिया की पीठ पर हाथ रखकर बोली बसंती। बसंती के अचानक ...
  • 554
    6

    वह रिश्ते जो खड़े होते हैं शक और अविश्वास की बुनियाद पर ढह जाते हैं रेत के घर-घूलों की तरह इन रिश्तों का कोई अस्तित्व न ...
  • 699
    14

    मेरी परीक्षायें समाप्त हो चुकी हैं!अब जैसे-जैसे रिजल्ट आने का समय करीब आता जा रहा है मेरे दिल की धड़कन बढ़ती जा रही है!इतनी कोशिशों के ...
  • 796
    10

    कल मैंने देखा था तुम्हें अपने जन्मदिन के एक समारोह में गरीबों को कंबल,अनाज,फल और रूपये बांटते हुए और आज उस गरीब को तुमने अपने दरवाजे ...
  • 542
    0

    अरे आरोही!तू यहां….?अपनी फास्ट फ्रेंड आरोही को पूना की एक फाइव स्टार होटल में अचानक देखकर राहा बोली! हाँ यार!तुझे पता है मुझे भी पूना में ...
  • 75430
    57

    तुम पतझड़ में उजड़े हुए बाग की तरफ देखते ही क्यों हो….! खिले हुए चमन को देखो ना तुम ठहरे हुए तालाब के पानी को देखते ...
  • 536
    4

    शादी के 5 साल बाद भी बिरहा मां नहीं बन पाई बस इसी बात की चिंता उसे खाए जा रही है। सासू मां अक्सर उसे इस ...